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India: New Delhi - 6th Day of Fast Against Mob-lynching

Friday 30 June 2017, by siawi3

Source: Peoples Media Advocacy & Resource Centre- PMARC

30.06.2017

6th Day of Fast Against Mob-lynching

Listening to poems, opinions, discussions and even heated arguments at the venue of the Fast is a unique experience. It is as if diverse public voices, different shades of academicia, soul- searching poets and social philosophers have all come together to speak about the crisis afflicting the country. It is a very reassuring experience in itself. Yesterday, Bhai Mithilesh Shrivastav read his poem ’शिविर एक दिन खाली हो गया’. Himkar, Yogesh and Neeraj read stirring poems by senior and many new poets. Abhishek Shrivastav did not read his own poems but he made significant suggestions on how to plan solid and consistent work to put a stop to mob-lynching. Sathi Amalesh Raju came to the Fast venue and supported the cause. Poet-journalist Vimal Kumar came again yesterday.
Senior colleagues Ramchandra Rahi and Anil Nauriya continually discussed for a long time the situation and problems in the country and in the world. Janata Dal (U) general secretary Arun Kumar Shrivastav came there but remained silent - ’मौन भी अभिव्यक्ति है, जितना तुम्हारा सच है उतना कहो’. I congratulated him for his party’s announcement to support the winning candidate in the next presidential election! He just smiled at that. Sathi Dr. Rajkumar Jain, Charan Singh Rajput, Ramesh Chand Sharma, Mahesh, Sadat Anwar and Akram and many many others were present yesterday at the venue.

Medha Patkar visited the venue and made the suggestion that it will be good if all of us observe the Fast at the Jantar Mantar on the last day i.e. tomorrow on July 1.

Senior journalist and writer Kuldip Nayyar will be present between 4 pm and 6 pm tomorrow at the end of the fast.

Prem Singh

उपवास स्थल पर कवितायेँ, मत, चर्चाएँ और गरमागरम तर्क सुनने का अनुभव विरल है. गोया विभिन्न जन-स्वर, अलग-अलग रंगत के विद्वान्, आत्मा की तलाश करने वाले कवि और सामाजिक चिंतक देश को अपनी गिरफ्त में लेने वाले गंभीर संकट पर आवाज उठाने के लिए एक साथ आ गए हैं. यह आश्वस्त करता है. कल भाई मिथिलेश श्रीवास्तव ने अपनी कविता ’शिविर एक दिन खाली हो गया’ पढ़ी. हिमकर, योगेश, नीरज कई नए-पुराने कवियों की कवितायेँ पढ़ते रहे. अभिषेक श्रीवास्तव ने कविता तो नहीं सुनाई, चर्चा में भीड़तंत्र की प्रवृत्ति को ख़त्म करने के लिए सरोकारधर्मी साथियों से एक साथ आकर ठोस और लगातार काम करने का महत्वपूर्ण सुझाव रखा. साथी अमलेश राजू ने आकर समर्थन दिया. कवि-पत्रकार साथी विमल कुमार कल फिर आये.
वरिष्ठ साथी रामचंद्र राही और अनिल नौरिया बैठे हुए देर तक देश और दुनिया की स्थिति और समस्याओं पर गंभीर चर्चा करते रहे. साथी जद (यू) महासचिव अरुण कुमार श्रीवास्तव आये और मौन बैठे रहे - ’मौन भी अभिव्यक्ति है, जितना तुम्हारा सच है उतना कहो’. मैंने उन्हें निश्चित जीत वाले अगले राष्ट्रपति को जिताने की उनकी पार्टी की घोषणा के लिए बधाई दी! वे मुस्कुरा भर दिए. साथी डॉ. राजकुमार जैन, चरण सिंह राजपूत, रमेश चंद शर्मा, महेश, सादात अनवर और अकरम तथा बहुत से साथी कल भी उपस्थित रहे.

मेधा पाटकर आयीं और सुझाव दिया कि अंतिम दिन यानी कल 1 जुलाई को हम सभी साथी जंतर मंतर पर उपवास पर बैठें तो अच्छा रहेगा.

उपवास की समाप्ति पर कल शाम 4 से 6 बजे की बीच वरिष्ठ पत्रकार और लेखक कुलदीप नैयर हमारे बीच मौजूद रहेंगे.

प्रेम सिंह

Dr. Prem Singh
Dept. of Hindi
University of Delhi
Delhi - 110007 (INDIA)
Mob. : +918826275067

Former Fellow
Indian Institute of Advanced Study, Shimla
India

Former Visiting Professor
Center of Eastern Languages and Cultures
Dept. of Indology
Sofia University
Sofia
Bulgaria